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<title> مجله دانشگاه علوم پزشكي اراك </title>
<link>http://jams.arakmu.ac.ir</link>
<description>مجله دانشگاه علوم پزشکی اراک - مقالات نشریه - سال 1382 جلد7 شماره1</description>
<generator>Yektaweb Collection - https://yektaweb.com</generator>
<language>fa</language>
<pubDate>1382/12/11</pubDate>

					<item>
						<title>بیان پروتئین نو ترکیب P39 بر وسلا آبورتوس در باکتری اشریشیا کلی</title>
						<link>http://amuj.arakmu.ac.ir/~amuj/browse.php?a_id=6775&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size:16px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family:Tahoma;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;مقدمه:&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;بروسلوز از مهم ترین بیماری های زئونوتیک است که باعث سقط جنین و نازایی در دام ها و بروز تب مواج در انسان می گردد. استفاده از واکسن رایج یعنی سویه&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;&amp;nbsp;S19&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;بروسلا آبورتوس عوارض متعددی برای دام ها دارد. پروتیین&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;&amp;nbsp;P39&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;بروسلا از جمله پروتیین های فضای پری پلاسمیک است که به عنوان یکی از شاخص های مهم ایمنی زا مطرح است. با تولید پروتیین نو ترکیب&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;P39&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; &lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;می توان مطالعات بیش تری در زمینه توانایی این پروتئین در تحریک پاسخ های ایمنی زا بر علیه بروسلا انجام داد. لذا در این تحقیق تولید و تخلیص این پروتئین در باکتری اشریشیا کلی به صورت نو ترکیب انجام گرفته است&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12.0pt;&quot;&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br&gt;
&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;روش کار:&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;در این تحقیق تجربی با استفاده از واکنش زنجیره ای پلیمراز، ژن&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;P39&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; &lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;از باکتری بروسلا آبورتوس تکثیر گردید. پس از تخلیص ژن&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;P39&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;، در ناقلین پلاسمیدی&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;&amp;nbsp;و pSK+ &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;4T1&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;&amp;nbsp;pGEX&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;کلون گردید. بنابراین ساختارهای&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;P39&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;-&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;pSK+&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;و&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;P39&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;-4T1&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt; pGEX&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;تهیه گردید. برای تولید پروتیین نوترکیب&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt; P39&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;ابتدا ساختار پلاسمیدی&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;P39&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;-4T1&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt; pGEX&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;وارد باکتری اشریشیا کلی سویه&amp;nbsp;BL21&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;شد. سپس تولید پروتیین با القای پلاسمید&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;P39&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;-4T1&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt; pGEX&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;توسط&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt; IPTG &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;صورت گرفت. پروتیین تولید شده با استفاده از کیت تخلیص پروتئین گلوتاتیون اس ترانسفرآز سفارز خالص گردید. میزان پروتیین خالص شده با استفاده از روش براد فورد اندازه گیری شد&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12.0pt;&quot;&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br&gt;
&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;نتایج:&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;ترادف نوکلئوتیدی ژن تکثیر شده توسط&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt; PCR &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;کلون شده در ناقل پلاسمیدی&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;+pSK &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;کاملا با ژن&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;P39&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;بروسلا آبورتوس یکسان بود. تولید پروتیین&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;P39&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;با القا پلاسمید&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;P39&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;-4T1&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt; pGEX&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;انجام گردید. میزان پروتیین خالص شده برابر &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;200&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt; میکروگرم در میلی لیتر به دست آمد&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12.0pt;&quot;&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br&gt;
&lt;strong&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;نتیجه گیری:&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;تولید پروتیین نو ترکیب&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt; P39&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;بروسلا آبورتوس که در سیتوپلاسم باکتری اشریشیا کلی ناپایدار است، با استفاده از ناقلین دارای پروتیین الحاقی نظیر&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;4T1 &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;&amp;nbsp;pGEX&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;در میزبان اشریشیا کلی سویه&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;BL21&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; &lt;span style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;امکان پذیر است&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot; style=&quot;background:#FCFCFC;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color:#707070;&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family:Times New Roman,serif;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12.0pt;&quot;&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;</description>
						<author>حمید ابطحی</author>
						<category></category>
					</item>
					
					<item>
						<title>استفاده از ثابت کننده خارجی در درمان شکستگی های انتهای رادیوس</title>
						<link>http://amuj.arakmu.ac.ir/~amuj/browse.php?a_id=6776&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size:16px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family:Tahoma;&quot;&gt;&lt;strong&gt;مقدمه:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;شکستگی انتهای رادیوس یکی از شکستگی های شایع اندام فوقانی است که درمان آن مورد بحث و اختلاف نظر است و درمان نامناسب می تواند عوارض قابل توجهی به دنبال داشته باشد. در این مطالعه قصد داریم نتایج درمان با روش ثابت کننده خارجی را بررسی نماییم&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br&gt;
&lt;strong&gt;روش کار:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;مطالعه به صورت بدون شاهد و نمونه گیری به روش آسان بود. این بررسی به مدت یک سال روی ۳۰ شکستگی (۲۶ بیمار) انجام شد که براساس رادیوگرافی محل شکستگی نوع ۴ یونیورسال ۵ بودند. عمل جراحی با تکنیک استاندارد با بیهوشی عمومی یا منطقه ای انجام و بیماران تا یک سال پس از عمل جراحی پیگیری و از نظر میزان کوتاهی، زاویه سطح مفصلی و دامنه حرکتی و وجود درد مورد بررسی قرار گرفتند&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br&gt;
&lt;strong&gt;نتایج:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;۲۴ مرد و ۲ زن با میانگین سنی ۵&amp;plusmn;۲۸ سال مورد بررسی قرار گرفتند. در همه بیماران جوش خوردن به طور بالینی و رادیوگرافی حاصل شد. ۲ مورد عفونت خفیف محل پین وجود داشت که با درمان دارویی برطرف شد. در یک مورد اختلال خفیف شاخه حسی عصب رادیال روی داد که پس از مدتی برطرف شد و در هیچ مورد ضایعه تاندونی وجود نداشت. میانگین انحراف به طرف کف دست ۶/۶&amp;plusmn;۵/۴ و انحراف اولنار ۴/۵&amp;plusmn;۱۲/۵ بود&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;.&amp;nbsp;&lt;/span&gt;در ۴ مورد درد هنگام فعالیت های شدید، ۲ مورد محدودیت حرکت خفیف و یک مورد محدودیت حرکت شدید وجود داشت&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br&gt;
&lt;strong&gt;نتیجه گیری:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;در مقایسه با سایر مطالعات نتایج این مطالعه در بسیاری از موارد خیلی بهتر است و توصیه می شود که در درمان شکستگی های ناپایدار انتهای تحتانی رادیوس و به خصوص در صورت توسعه به داخل مفصل رادیوکارپال از این روش درمانی استفاده شود&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;</description>
						<author>محمدرضا اعتمادی فر</author>
						<category></category>
					</item>
					
					<item>
						<title>ردیابی آسیب شنوایی ناشی از نوفه با استفاده از آزمون پرتوهای صوتی گوشی</title>
						<link>http://amuj.arakmu.ac.ir/~amuj/browse.php?a_id=6777&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size:16px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family:Tahoma;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot;&gt;مقدمه:&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot;&gt;پرتوهای صوتی گوشی به عنوان آزمون معتبری که فعالیت سلول های مویی خارجی را منعکس می کنند شناخته شده اند و از این رو برای ارزیابی تغییرات حلزونی نظیر آنچه که بعد از قرارگیری در معرض نوفه (نویز) ایجاد می شود بسیار مفید می باشند&lt;/span&gt;.&lt;br&gt;
&lt;strong&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot;&gt;روش کار:&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot;&gt;طی یک مطالعه کارآزمایی بالینی &lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot;&gt;۷۴&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot;&gt; فرد داوطلب &lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot;&gt;۲۵-۱۸&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot;&gt; ساله به شیوه نمونه گیری تصادفی ساده مورد بررسی قرار گرفتند. نتایج آزمایشات ادیومتری اصوات خالص و تمپانومتری شرکت کنندگان در روز انجام آزمایش در محدوده هنجار قرار داشت. در این پژوهش ابتدا آزمون های پرتوهای صوتی گوشی خود به خودی، گذرا، و اعوجاجی از هر دو گوش فرد مورد آزمایش به عمل می آمد که به عنوان یک سطح پایه ارزیابی برای ما در نظر گرفته می شد. سپس یک گوش فرد انتخاب شده و در شدت&lt;/span&gt; SPL &lt;span dir=&quot;RTL&quot;&gt;۱۰۰&lt;/span&gt; &lt;span dir=&quot;RTL&quot;&gt;دسی بل و به مدت &lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot;&gt;۵&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot;&gt; دقیقه در گوش وی نوفه ارایه می گردید. پس از گذشت &lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot;&gt;۲ دقیقه پس از خاتمه ارایه نوفه، مجددا ارزیابی های قبلی در هر دو گوش تکرار می گردید&amp;nbsp;و دامنه پاسخ ها در دو گوش با یکدیگر مقایسه می شدند.&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;br&gt;
&lt;strong&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot;&gt;نتایج:&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot;&gt;در &lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot;&gt;۳۴&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot;&gt; نفر از افراد شرکت کننده ارایه نوفه در گوش تحت نوفه منجر به کاهش سطح دامنه و یا حذف پاسخ های SOAE شد. یکی از یافته های جالب در این تحقیق ظهور قله های جدید درپاسخ های SOAE&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;span dir=&quot;RTL&quot;&gt;در گوش مقابل پس از ارایه نوفه بود. نوفه ارایه شده کاهش آماری معنا داری را در دامنه پاسخ TEOAE&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;span dir=&quot;RTL&quot;&gt;هم در گوش تحت تاثیر نوفه و هم در گوش مقابل آن پدید آورد. مقایسه میانگین دامنه پاسخ های DPOAE قبل&amp;nbsp;و بعد از قرار گیری در معرض نوفه در گوش تحت تاثیر نوفه، در محدوده &lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot;&gt;۶۲۹۹- ۱۶۸۵&amp;nbsp;هرتز معنا دار بود،&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot;&gt;ولی این مقایسه در گوش مقابل معنی دار نبود. میانگین زمان نهفتگی DPOAE&amp;nbsp;در قبل و بعد از قرارگیری در &lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot;&gt;معرض نوفه هم در گوش تحت تاثیر نوفه و هم در گوش مقابل آن، اختلاف آماری معنا داری را نشان نداد.&lt;/span&gt;&lt;br&gt;
&lt;strong&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot;&gt;نتیجه گیری:&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;span dir=&quot;RTL&quot;&gt;یافته های این پژوهش نشان داد که پرتوهای صوتی گوشی یک ابزار مناسب در ردیابی آسیب شنوایی ناشی از نوفه می باشند. همچنین&lt;/span&gt; TEOAEs &lt;span dir=&quot;RTL&quot;&gt;در مقایسه با سایر آزمون ها از حساسیت بیش تری در ردیابی این آسیب برخوردار است و حتی می توان آنرا به عنوان یک ابزار غربالگری بسیار سریع جهت بررسی حساسیت پذیری نسبت به آسیب شنوایی ناشی از نوفه پیش از ورود به&amp;nbsp;محیط های صنعتی پر سر و صدا در نظر گرفت.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;</description>
						<author>آرش بیات</author>
						<category></category>
					</item>
					
					<item>
						<title>تعیین الگوی فعالیت بدنی کودکان استان های مرکزی و اصفهان سال 1381</title>
						<link>http://amuj.arakmu.ac.ir/~amuj/browse.php?a_id=6778&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size:16px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family:Tahoma;&quot;&gt;&lt;strong&gt;مقدمه:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;از عوامل خطرزای بیماری های عروق کرونر به فعالیت جسمی خصوصا در کودکان و نوجوانان کم تر توجه شده است. مطالعات مختلفی میزان فعالیت جسمی آنان را از حد استاندارد برای حفظ سلامتی پایین تر نشان داده است. در این مطالعه الگوی فعالیت جسمی کودکان و نوجوانان نواحی مرکزی ایران بررسی می گردد&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br&gt;
&lt;strong&gt;روش کار:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;در این مطالعه توصیفی که قسمتی از مرحله اول طرح قلب سالم اصفهان می باشد و در سال 1381 صورت گرفته، آگاهی نگرش و عملکرد 4000 کودک و نوجوان شهری و روستایی مقطع پیش دبستانی تا دبیرستان استان های اصفهان (شهرستان اصفهان و نجف آباد) و مرکزی (شهرستان اراک) و والدین این دانش آموزان و 500 نفر از مربیان و مسئولین مدارس، در مورد فعالیت فیزیکی و مدت زمان تماشای تلویزیون از طریق پرسشنامه مورد بررسی قرار گرفته است. نمونه گیری به شکل خوشه ای تصادفی و به نسبت جمعیت شهری و روستایی ساکن در دو استان انتخاب شده است. داده ها با نرم افزار&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt; SPSS &lt;/span&gt;تجزیه و تحلیل و P&lt;0/05&amp;nbsp;معنی دار تلقی شد&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br&gt;
&lt;strong&gt;نتایج:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;حدود 40 درصد دانش آموزان مقطع راهنمایی و دبیرستان در دو استان کم تر از دو ساعت در هفته در مدرسه ورزش منظم انجام می دادند. میزان انجام ورزش صبحگاهی منظم و ساعات ورزش مدرسه در دختران بیش از پسران (P&lt;0/00001)&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;ولی ورزش منظم خارج از مدرسه و عضویت در تیم ورزشی در پسرها بیش تر بوده است (P&lt;0/001)&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&amp;nbsp;بیش از 77 درصد والدین نسبت به اهمیت ورزش دوران کودکی در سلامت فرزندانشان آگاهی نداشتند. میانگین مدت زمان تماشای تلویزیون در کودکان سنین مختلف 4 ساعت در روز بوده است&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br&gt;
&lt;strong&gt;نتیجه گیری:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;میزان فعالیت جسمی دانش آموزان مقطع راهنمایی و دبیرستان نواحی مرکزی ایران کم تر از میزان مطلوب می باشد و مدت زمان تماشای تلویزیون بیش از مقادیر توصیه شده می باشد&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;</description>
						<author>فاطمه دره</author>
						<category></category>
					</item>
					
					<item>
						<title>بررسی ارتباط میان ابتلا به بیماری پسوریازیس و وجود کاندیدا آلبیکنس حفره دهان</title>
						<link>http://amuj.arakmu.ac.ir/~amuj/browse.php?a_id=6779&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;span style=&quot;font-size:16px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family:Tahoma;&quot;&gt;&lt;strong&gt;مقدمه:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;در بعضی از مقالات احتمال افزایش شیوع کاندیدای دهانی در بیماران دچار پسوریازیس و همچنین احتمال تاثیر آن در تشدید و یا مزمن شدن بیماری پسوریازیس مطرح شده است. لذا بررسی شیوع کاندیدای دهانی در بیماران مبتلا به پسوریازیس و مقایسه آن با افراد سالم مورد توجه قرار گرفته است&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br&gt;
&lt;strong&gt;روش کار:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;در این مطالعه مقطعی 43 فرد مبتلا به پسوریازیس و 43 فرد به ظاهر سالم مراجعه کننده به درمانگاه های پوست وابسته به دانشگاه علوم پزشکی اصفهان به صورت تصادفی انتخاب و از لحاظ وجود یا عدم وجود کاندیدا آلبیکنس در مخاط دهان توسط لام مستقیم و کشت مورد بررسی قرار گرفتند&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br&gt;
&lt;strong&gt;نتایج:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;بر طبق نتایج این مطالعه تحلیلی، 44/2 درصد از بیماران مبتلا به پسوریازیس با کاندیدا آلبیکنس حفره دهان آلوده بودند که این میزان برای افراد سالم 25/6 درصد بود و این اختلاف معنی دار بود (P=0/05). همچنین رابطه معنی داری بین شدت پسوریازیس و شیوع کاندیدا آلبیکنس دهان وجود داشت (P=0/05).&lt;br&gt;
&lt;strong&gt;نتیجه گیری:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;در این تحقیق مشخص شد که شیوع مخمر کاندیدا در بیماران مبتلا به پسوریازیس بیش تر از افراد سالم است. با توجه به نتایج این مطالعه، توصیه می شود که کلیه بیماران دارای پسوریازیس از لحاظ وجود کاندیدا آلبیکنس دهان بررسی شده و در صورت مثبت بودن آزمایش، تحت درمان مناسب با داروهای ضد قارچ قرار گیرند&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;</description>
						<author>عباس رضایی</author>
						<category></category>
					</item>
					
					<item>
						<title>بررسی اثر همودیالیز بر سطح پر اکسیداسیون لیپید پلاسما و آنزیم آنتی اکسیدان گلبول های قرمز در بیماران مبتلا به نارسایی کلیه قبل و بعد از دیالیز</title>
						<link>http://amuj.arakmu.ac.ir/~amuj/browse.php?a_id=6782&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size:16px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family:Tahoma;&quot;&gt;&lt;strong&gt;&amp;nbsp;مقدمه:&lt;/strong&gt; بیمارانی که دچار بیماری مزمن کلیوی هستند و همودیالیز می شوند بیش تر در معرض تخریب سلولی رادیکال های آزاد می باشند. هدف از این مطالعه ارزیابی تاثیر همودیالیز بر تغییرات سطح پراکسیداسیون لیپید پلاسما و فعالیت آنزیم آنتی اکسیدان گلبول قرمز می باشد.&lt;br&gt;
&lt;strong&gt;روش کار&lt;/strong&gt;: مطالعه از نوع تحلیلی و روش نمونه گیری مبتنی بر هدف بود. 22 بیمار همودیالیزی واجد شرایط مطالعه که جهت دیالیز به بخش دیالیز مرکز آموزشی درمانی 5 آذر گرگان مراجعه می نمودند و 22 فرد سالم که از لحاظ سن و جنس با بیماران همودیالیزی همسان شدند به طور تصادفی برای مطالعه انتخاب گردیدند. سطح پراکسیداسیون لیپید پلاسما (که به صورت مالون دی آلدئید) بیان می شود و فعالیت آنزیم آنتی اکسیدان گلبول قرمز (سوپر اکسید دیسموتاز) قبل و بعد از عمل دیالیز در گروه بیماران بررسی و مقایسه شد. همچنین در هر مقطع، موارد ذکر شده با گروه افراد سالم نیز مقایسه گردید. داده های پژوهش با استفاده از نرم افزار &lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;SPSS&lt;/span&gt; تجزیه و تحلیل شد و اطلاعات به دست آمده با استفاده از آزمون آماری تی دانش آموزی مورد ارزیابی قرار گرفت.&amp;nbsp;&lt;br&gt;
&lt;strong&gt;نتایج&lt;/strong&gt;: سطح پلاسمایی مالون دی آلدئید گروه کنترل و قبل از دیالیز بیماران همودیالیزی اختلاف معنی داری نشان داد (P&lt;0/001). همچنین سطح پلاسمایی مالون دی آلدئید بیماران همودیالیزی بعد از دیالیز در مقایسه با قبل از دیالیز و گروه کنترل افزایش معنی داری نشان داد (در هر مورد P&lt;0/001)، فعالیت آنزیم آنتی اکسیدان گلبول قرمز بیماران همودیالیزی نیز بعد از دیالیز در مقایسه با قبل از دیالیز و گروه کنترل کاهش معنی داری داشت. بعد از دیالیز در مقایسه با قبل از دیالیز و گروه کنترل کاهش معنی داری داشت (P&lt;0/001).&lt;br&gt;
&lt;strong&gt;نتیجه گیری&lt;/strong&gt;: کاهش فعالیت آنزیم آنتی اکسیدان گلبول قرمز و افزایش میزان پراکسیداسیون لیپید پلاسمای بیماران همودیالیزی ممکن است در پیشرفت بیماری های قلب و عروق در آنان نقش مهمی داشته باشد، بنابراین به کار گیری تدابیری جهت به حداقل رسانیدن این تغییرات می تواند در کاهش خطر این بیماری ها و بهبود کیفیت زندگی بیماران تحت همودیالیز اهمیت به سزایی داشته باشد.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;</description>
						<author>عبدالجلال مرجانی</author>
						<category></category>
					</item>
					
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						<title>شواهد سرولوژیک و مولکولی هپاتیت B در بیماران مبتلا به هپاتیت C مزمن</title>
						<link>http://amuj.arakmu.ac.ir/~amuj/browse.php?a_id=6780&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;span style=&quot;font-size:16px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family:Tahoma;&quot;&gt;&lt;strong&gt;مقدمه:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;هپاتیت&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt; B &lt;/span&gt;مخفی حالتی است که آنتی ژن سطحی هپاتیت&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt; B &lt;/span&gt;در سرم بیمار منفی بوده ولی&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt; DNA &lt;/span&gt;ویروس هپاتیت&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt; B &lt;/span&gt;در سرم یا بافت کبدی ایشان قابل کشف باشد. در این مطالعه فراوانی هپاتیت&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt; B &lt;/span&gt;مخفی در بیماران هپاتیت&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;&amp;nbsp;C&amp;nbsp;&lt;/span&gt;مزمن و نیز تغییرات بیوشیمیایی و هیستولوژیک آنان تحت بررسی قرار گرفت&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br&gt;
&lt;strong&gt;روش کار:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;در این مطالعه توصیفی نمونه گیری به صورت مبتنی بر هدف انجام شد، به طوریکه 27 بیمار هپاتیت&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt; C &lt;/span&gt;مزمن که&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt; HBsAg &lt;/span&gt;آنها منفی بوده و طی سال های 1380 و 1381 به دو مرکز هپاتیت تهران و مرکز تحقیقات بیماری های گوارش و کبد دانشگاه علوم پزشکی شهید بهشتی مراجعه و تحت نمونه برداری کبد قرار گرفته بودند وارد مطالعه شدند. بر روی بلوک پارافینی نمونه کبدی این بیماران آزمایشات واکنش زنجیره ای پلیمراز برای وجود&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt; HBVDNA &lt;/span&gt;و نیز آزمایش های ایمونوهیستو شیمی برای حضور و کشف&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt; HBsAg &lt;/span&gt;و آنتی ژن مرکزی هپاتیت&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt; B &lt;/span&gt;انجام گرفت&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br&gt;
&lt;strong&gt;نتایج:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;از میان 27 نمونه بررسی شده&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt; PCR &lt;/span&gt;بیماران در 5 مورد (19درصد) از نظر&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt; HBVDNA &lt;/span&gt;مثبت گزارش شد. در کلیه این بیماران تست های&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt; IHC &lt;/span&gt;از نظر&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt; HBsAg &lt;/span&gt;و&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt; HBcAg &lt;/span&gt;منفی گزارش گردید. تغییرات هیستولوژیک سیروز و علایم سیروز جبران نشده فقط در گروه&amp;nbsp;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt; HBVDNA &lt;/span&gt;مثبت دیده شد&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br&gt;
&lt;strong&gt;نتیجه گیری:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;فراوانی هپاتیت&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt; B &lt;/span&gt;مخفی در بیماران مبتلا به هپاتیت&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt; C &lt;/span&gt;نسبتا قابل توجه است. در این بیماران، هپاتیت&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt; B &lt;/span&gt;مخفی می تواند آسیب به کبد را تشدید نموده، روند پیشرفت به طرف سیروز را تسریع نماید&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;</description>
						<author>زهرا هنر کار</author>
						<category></category>
					</item>
					
					<item>
						<title>مقایسه اثر درمانی و عوارض پروپوفول و تیوپنتال سدیم در بیماران تحت درمان با تشنج درمانی با الکتریسته</title>
						<link>http://amuj.arakmu.ac.ir/~amuj/browse.php?a_id=6781&amp;sid=1&amp;slc_lang=fa</link>
						<description>&lt;div style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size:16px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family:Tahoma;&quot;&gt;&lt;strong&gt;مقدمه:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;تشنج درمانی با الکتریسیته یکی از مهم ترین روش های درمانی در روان پزشکی است که به عنوان کم عارضه ترین درمان در اختلالات روانی مورد استفاده قرار می گیرد. از داروهای بیهوشی مهمی که به طور معمول در ایران به این منظور مصرف می شود تیوپنتال سدیم با دوز 3/5-0/5 میلی گرم بر کیلوگرم و پروپوفل با دوز3-2 میلی گرم بر کیلوگرم می باشد که هر کدام از داروهای فوق تاثیرات مخصوص به خود را بر سیستم های مختلف بدن گذارده و پاسخ های متفاوت اتونومیک را در بیماران موجب می شود. بنابراین مقایسه اثرات درمانی و عوارض این دو دارو در بیماران تحت درمان با تشنج درمانی با الکتریسیته ضروری به نظر می رسد&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br&gt;
&lt;strong&gt;روش کار:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;در این مطالعه که یک مطالعه از نوع کار آزمایی بالینی متوالی متقاطع می باشد تعداد 40 بیمار کاندید تشنج درمانی با الکتریسته در دو نوبت مورد بررسی قرار گرفته اند که یک نوبت از داروی پروپوفل و نوبت بعدی از تیوپنتال سدیم جهت القای بیهوشی استفاده شد. اطلاعات قبل، حین و بعد از عمل از نظر مدت زمان تشنج، فشار خون، ضربان قلب و میزان آگاهی فرد توسط پرسشنامه جمع آوری و مورد تجزیه و تحلیل آماری قرار گرفت&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br&gt;
&lt;strong&gt;نتایج:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;مدت زمان تشنج در مورد پروپوفل کم تر از تیوپنتال بود که این اختلاف از نظر آماری معنی دار بود&amp;nbsp;(P&lt;0/001).&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt; &lt;/span&gt;شار خون در مورد تیوپنتال به مقدار زیادی نسبت به پروپوفل افزایش نشان داد&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt; &lt;/span&gt;(P&lt;0/001).&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt; &lt;/span&gt;همچنین گروه گیرنده تیوپنتال افزایش بیش تر ضربان قلب را نشان می داد اما این اختلاف معنی دار نبود&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br&gt;
&lt;strong&gt;نتیجه گیری:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;استفاده از پروپوفل در تشنج درمانی با الکتریسیته نسبت به تیوپنتال عوارض کم تری دارد و استفاده از آن توصیه می شود.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span dir=&quot;LTR&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family:IRANSans,serif;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size:12.0pt;&quot;&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;</description>
						<author>بیژن یزدی</author>
						<category></category>
					</item>
					
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